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बैंक रिटायर कर्मचारियों का देशव्यापी आंदोलन तेज, वाराणसी में जोरदार प्रदर्शन; 16 जनवरी को फिर होगा बड़ा धरना

मांगो के समर्थन

देश भर के बैंक सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। ऑल इंडिया बैंक रिटायरी फेडरेशन (AIBRF) के आह्वान पर यह आंदोलन का दूसरा चरण है। इसी क्रम में, हाल ही में वाराणसी के लंका क्षेत्र स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय के गेट पर कर्मचारियों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी अपनी न्यायसंगत मांगों को जल्द पूरा करने की मांग कर रहे हैं, जिसके लिए 16 जनवरी को एक और बड़ा प्रदर्शन प्रस्तावित है।

AIBRF की उत्तर प्रदेश राज्य सेंट्रल कमेटी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में यह आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह आंदोलन रिटायर कर्मचारियों की पांच प्रमुख मांगों पर केंद्रित है। AIBRF वाराणसी यूनिट द्वारा 9 जनवरी को सेंट्रल बैंक रीजनल ऑफिस, लंका में दोपहर 1 बजे से द्वितीय चरण का धरना प्रदर्शन सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इससे पूर्व 26 दिसंबर को इंडियन बैंक, नदेसर शाखा पर भी भारी भीड़ के साथ पहला धरना प्रदर्शन किया गया था।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँगे निम्नलिखित हैं:

1. आरबीआई (RBI) फॉर्मूले के अनुसार पेंशन अपडेशन लागू किया जाए।

2. वर्ष 2012 के बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों को स्पेशल अलाउंस पर रिटायरमेंट बेनिफिट्स प्रदान किए जाएं।

3. रिटायर कर्मचारियों के ग्रुप मेडिकल इंश्योरेंस पर शून्य (Zero) GST लगाया जाए।

4. रिटायर कर्मचारियों के लिए सुपर टॉप-अप मेडिकल इंश्योरेंस में इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) द्वारा L-1 प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित हो।

5. रिटायर कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान हेतु IBA में शीर्ष स्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली की स्थापना की जाए।

इस आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए, AIBRF वाराणसी यूनिट ने अगले चरण की घोषणा कर दी है। तीसरा और आगामी धरना प्रदर्शन 16 जनवरी को बैंक ऑफ इंडिया, जोनल ऑफिस, महमूरगंज, वाराणसी पर दोपहर 1 बजे आयोजित किया जाएगा। संगठन ने सभी बैंक सदस्यों और पदाधिकारियों से आग्रह किया है कि वे इस कार्यक्रम में पिछली भीड़ से भी अधिक संख्या में शामिल होकर अपनी एकता और शक्ति का प्रदर्शन करें।

रिटायर्ड कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख और न्यायोचित माँगे पूरी नहीं हो जातीं, तब तक यह देशव्यापी आंदोलन और हड़तालें इसी तरह जारी रहेंगी। एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।